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संगति का असर | Life Changing Story

Sangati ka Asar | संगति का असर
Sangati ka Asar | संगति का असर

दोस्तों, आज हम एक ऐसी बात पर विचार करने वाले है, जिसे हम सब जानते हैं,, लेकिन उस बात को मानते नहीं हैं! क्यूंकि हमें अक्सर वो लोग ही अच्छे लगने लग जाते है, जिनके साथ हमें समय बिताने की आदत हो जाती है, परन्तु ये साथ हमारे लिए कितना अच्छा है या बुरा है, ये समझने की कोशिश नहीं करते हैं !

कहा जाता है ना की,, यदि आप अच्छे लोगो के साथ रहते है तो आप अच्छा सीखोगे और बुरे लोगो के साथ रहोगे तो निश्चित ही आपकी सोच और आदते भी वैसे ही बुरी बन जाएगी! तो आइए इसे हम एक कहानी के जरिये समझते हैं की संगति आपके जीवन में क्या असर डालती है! उसका एक उदाहरण देखें और सीखे की हमें जीवन में किन लोगो के साथ अपनी संगति रखना चाहिए!

एक शहर में बहुत अमीर आदमी रहता था उसके पास इतना धन था कि उसे किसी प्रकार की चिंता नही थी लेकिन उसका एकलौता बेटा अपने पिता के धन से खूब ऐश करता था तथा बुरी आदतों वाले दोस्तों के साथ रहता था, जिसके कारण वह भी बुरी आदतों से घिर गया था उसके अंदर भी तमाम ऐसी बुरी आदतों का विकास हो गया था जिससे उसके पिता बहुत चिंतित रहने लगे थे !

फिर एक दिन पिता ने अपने बेटे की बुरी आदतों को सुधारने के लिए उसे हर प्रकार से समझाने की कोशिश कि पर उसका बेटा अपने पिता की बातो पर ध्यान ही नही देता था

तो ऐसे में परेशान होकर उसके पिता ने उसे एक सबक के जरिये संगति के असर के फायदे और नुकसान के बारे में सिखाना चाहा! इसके लिए वह अमीर आदमी अपने बेटे के साथ बाजार गया और वहां से कुछ सेब ख़रीदे और उन्ही सेब के साथ एक सड़ा हुआ सेब खरीद लिया फिर घर लौटने के बाद पिता ने अपने बेटे को सभी सेब को अलमारी में रखने को कहा! पिता की बात सुनकर बेटे ने सभी सेब को एक साथ अलमारी में रख दिया!

फिर कुछ दिन बाद पिता ने अपने बेटे से अलमारी में से वही सभी सेब लाने को कहा, तो जब बेटा अलमारी में से सेब लेने गया और जैसे ही अलमारी खोली, तो देखा की सभी सेब सड़ चुके थे! जिसे देखकर वह बहुत ही हैरान हुआ और सेब के सड़े होने की बात अपने पिता को बताई !

अपने बेटे की बात सुनकर पिता बोले, देखा बेटा हमने उस दिन बाजार में अच्छे सेब के साथ एक सड़ा हुआ सेब भी ख़रीदा था ! जिसके कारण साथ में रखे हुए बाकि के अच्छे सेब भी बुरी संगति के कारण खराब हो गए!

यही बात तुम्हारे साथ भी फिट बैठती है यदि तुम बुरे दोस्तों की संगति में रहते हो तो तुम्हारी सोच और आदते भी वैसे ही हो जायेगी फिर चाहकर भी तुम अच्छे इन्सान नही बन सकते हो.

पिता की बात सुनकर अब उसको समझ में आ गया था कि कुसंगति के प्रभाव से अच्छा आदमी भी बुरा और सत्संगति की प्रभाव से बुरा इन्सान भी अच्छा बन सकता है और फिर उसने अपने पिता से अपनी की हुई गलती पर माफ़ी मांगकर आगे से गलत लोगो की संगति छोड़ने का वचन दिया!

************************** कहानी से शिक्षा ******************************

वो कहा गया है ना,, जैसी संगत वैसी ही रंगत यानी आप जैसे लोगो के साथ रहेगे वैसा ही बनेगे तो आपको भी अच्छा बनना है तो अच्छे लोगो के साथ अपनी संगति बनाये क्युँकि अच्छे लोगो की सलाह आपको अच्छा बनाती है, मतलब अगर आप फूल को हाथ में रखेंगे तो आपको खुशबु मिलेगी हाथो से और अगर काटों को हाथ में रखोगे तो दर्द मिलेगा.

आशा हैं, की आपको ये उदहारण समझ में आया हो आपने इसे अपने जीवन से मिलाने की कोशिश की हो और अपनी संगति पे ध्यान देने का सोचा हो! अगर आप हमारी बात से सहमत करते हो और आपको ये कहानी अच्छी लगी तो हमे कम्मेंट करके जरूर बताए!