Hindi Poem

मंजिल तेरे निकट होगी

दोस्तों जब हम बहुत सारे काम एक साथ कर रहे हो तो, यह जरुरी नहीं की है हम सारे काम Perfect तरीके से ही करेंगे सब कुछ हर बार सही ही हो यह जरुरी नहीं है| क्यूंकी कोई भी Perfect नहीं होता| ऐसे में अगर हम ये मान के बैठ जाये की हम यह काम नहीं करेंगे क्यूंकी हम पिछली बार सफल नहीं हुए थे और अपने प्रयास बंद कर दे तो हम दुनिया की भीड़ में कही खो जायेंगे और कभी सफल नहीं हो पाएंगे|

दोस्तों आज हम Pahals.in पर सफलता के महत्व को एक बेहतरीन कविता के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे है जो आपको अपने प्रयास कभी ना बंद करने के लिए प्रेरित करेगी
तो चलिए देखते है यह अनोखी कविता जिसका शीर्षक है ” मंजिल तेरे निकट होगी “

बढ़ता चल तू ऐ मुसाफिर
मंजिल तेरे निकट होगी
हौसला रख दिल में अपने
ख्वाहिशे तेरी पूरी होगी
संकल्प ले यदि मन में अपने
उत्साह कभी ना कम होंगे
बढ़े थे, बढ़े हैं और बढ़ते रहेंगे
हर बेडी़यो को तोड़ते रहेंगे
अगर दूर दिखती हो तेरी मंजिल
सब्र कर तू कभी गम ना कर
झोपड़ी से महल यदि है तुझको बनाना
तो कोशिश को अपने कभी कम ना कर
बड़ा चल बड़ा चल तू हर क्षण बढ़ा चल
विश्वास रख तू खुदा पर अपने
ख्वाइश तेरी पूरी होगी
बढ़ता चल तू ऐ मुसाफिर
मंजिल तेरे निकट होगी

हमे लाइफ में उम्मीद का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए सफलता जरूर मिलेंगी| असफलता हमें ये सिखाती है की हमे अपने प्रयास में थोड़ी और तेजी लाने की जरूरत है| तो हमें अपने प्रयास और बेहतर बनाने चाहिए नकी असफलता के डर से हार मन कर बैठ जाना चाहिए|

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