Hindi Poem

” तू अपने सपनों के लिए युद्ध कर “

Yudh Kar Poem

“सपनें”, दोस्तों सपना वो नहीं होता जो हम बंद आँखों से देखते हैं बल्कि वह होता है जिसे हम खुली आँखों से महसूस करते हैं|सपने तो हर कोई देखता है पर इसे पूरा करने की चाह कौन रखता है और अपने इन सपनो को अपनी आँखों में कैसे जिन्दा रखता है , यह मायने करता है|कई बार हम अपनी परिस्थितियों से परेशान होकर अपना सयंम खो देते हैं और अपना मार्ग बदल लेते हैं|

तो दोस्तों इसलिए आज हम एक ऐसी inspirational कविता लेकर आए हैं जो आपको जीवन में कभी भी Give Up ना करने के लिए प्रेरित करेगी, और आपके जीवन में सकरात्मकता भरने में मदद करेगी|
तो चलिए शुरू करते है आज की यह प्रेरक कविता जिसका शीर्षक है ” तू अपने सपने के लिए युद्ध कर “

माना हालात प्रतिकूल हैं, रास्तों पर बिछे शूल हैं
रिश्तों पे जम गई धूल है
पर तू खुद अपना अवरोध न बन
तू उठ…… खुद अपनी राह बना…

माना सूरज अँधेरे में खो गया है……
पर रात अभी हुई नहीं, यह तो प्रभात की बेला है
तेरे संग है उम्मीदें, किसने कहा तू अकेला है
तू खुद अपना विहान बन, तू खुद अपना विधान बन

सत्य की जीत हीं तेरा लक्ष्य हो
अपने मन का धीरज, तू कभी न खो
रण छोड़ने वाले होते हैं कायर
तू तो परमवीर है, तू युद्ध कर – तू युद्ध कर

इस युद्ध भूमि पर, तू अपनी विजयगाथा लिख
जीतकर के ये जंग, तू बन जा वीर अमिट
तू खुद सर्व समर्थ है, वीरता से जीने का हीं कुछ अर्थ है
तू युद्ध कर – बस युद्ध कर…

दोस्तों आपका आज का सपना, आपका आने वाला कल है, इसे पूरा करने के लिए आपको पुरे मन से मेहनत करना चाहिए|और इसके बीच आने वाली हर तरह की चुनौतियों का डट कर सामना करना चाहिए| क्यूंकी Give Up किसी problem का solution नहीं होता|

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