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हम चिल्लाते क्यों है? – An Educational Story

Why do we shout?
Why do we shout?

Why do we shout?

अक्सर हम यही सोचतें की हम दुसरो पर इसलिए चिल्लाते है, क्यूंकि हमे उनपर गुस्सा आरहा है, हम क्रोध के कारण अपने मन की शांति खो देते है और क्रोधित हो जाते है! लेकिन सिर्फ यही एक बात नहीं है की, हम चिल्लाते है हमारे अपनों पर! आइये हमारे इस चिल्लाने की वजह को हम जानते है, संभवतः इस कहानी को पढ़ने के बाद आप अपने प्रियजनों पर नहीं चिल्लायेंगे!

एक बार की बात है जब, एक सन्यासी अपने शिष्यों के साथ गंगा तट पर स्नान करने पहुचें. वहां उन्होंने देखा की, एक ही परिवार के कुछ लोग आपस में बात करते-करते अचानक ही एक दूसरे पर क्रोधित हो उठे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे.

संयासी यह देख तुरंत अपने शिष्यों की ओर देखे और उनसे पुछा ;

“अक्सर क्रोध में लोग एक दूसरे पर चिल्लाते क्यों हैं?”

सभी शिष्य कुछ देर सोचते रहे ,फिर एक ने उत्तर दिया, “क्योंकि हम क्रोध में शांति खो देते हैं इसलिए चिल्लाने लगते है!”

“पर जब दूसरा व्यक्ति हमारे सामने ही खड़ा है तो भला उस पर चिल्लाने की क्या ज़रुरत है, जो कहना है वो आप धीमी आवाज़ में भी तो कह सकते हैं”, सन्यासी ने पुनः प्रश्न किया|

कुछ और शिष्यों ने भी उत्तर देने का प्रयास किया पर सन्यासी एवं अन्य शिष्य संतुष्ट नहीं हुए|

अंततः सन्यासी ने समझाया…

“जब दो लोग आपस में नाराज होते हैं तो उनके दिल एक दूसरे से बहुत दूर हो जाते हैं और इस अवस्था में वे एक दूसरे को बिना चिल्लाये नहीं सुन सकते… वे जितना अधिक क्रोधित होंगे उनके बीच की दूरी उतनी ही अधिक हो जाएगी और उन्हें उतनी ही तेजी से चिल्लाना पड़ेगा!

तब फिर सन्यासी ने इस बात को ओर अधिक गहराई से समझाया –

जब दो लोग प्रेम में होते हैं तो क्या होता है ? तब वे चिल्लाते नहीं बल्कि धीरे-धीरे बात करते हैं, क्योंकि उनके दिल करीब होते हैं, उनके बीच की दूरी नाम मात्र की रह जाती है.” और जब वे एक दूसरे को हद से भी अधिक चाहने लगते हैं तो क्या होता है ? तब वे बोलते भी नहीं, वे सिर्फ एक दूसरे की तरफ देखते हैं और सामने वाले की बात समझ जाते हैं.”

कहानी से अभिप्रायः

इस कहानी से हमे से समझना चाहिए की जब तुम किसी से बात करो तो ये ध्यान रखो की तुम्हारे ह्रदय आपस में दूर न होने पाएं, तुम ऐसे शब्द मत बोलो जिससे तुम्हारे बीच की दूरी बढे, नहीं तो एक समय ऐसा आएगा कि ये दूरी इतनी अधिक बढ़ जाएगी कि तुम्हे लौटने का रास्ता भी नहीं मिलेगा!!! इसलिए चर्चा करो, बात करो लेकिन चिल्लाओ मत.”

उम्मीद है की आपको ये कहानी पसंद आयी होगी ओर आपने ये बात जान ली होगी की आपका चिल्लाना आपको अपने – अपनों से बहुत दूर कर सकता है !!

अगर अब आपने भी ये सोच लिया है की आप गुस्से में भी शांत रहके अपनी बात को बोलेंगे तो हमे लगेगा हमारा ये कहानी को समझना सफल हो गया है.

दोस्तों, अगर आप और भी मजेदार व ज्ञानवर्धक कहानिया पढ़ना चाहते तो बने रहे हमारे इस ब्लॉग पर। हमारी कहानी राजा की अपने पुत्रो को सीख को जरूर पढ़े। आप हमे अपने विचार ओर अनुभव कमेंट करके जरूर बताए, हमे आपके कमेंटस का इंतज़ार रहेगा !

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